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“बस्ती: माझा खुर्द में ‘सफेद सोने’ का काला खेल, क्या सिस्टम की शह पर सरयू का सीना चीर रहे बालू माफिया?”

"माझा खुर्द के अस्तित्व पर मंडराया संकट! अवैध खनन से बदल रही नदी की धारा, कटान की भेंट चढ़ जाएंगे दर्जनों गाँव।"

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: तबाही की कगार पर ‘माझा खुर्द’! खादी-खाकी और खनन विभाग की शह पर सरयू की कोख चीर रहे बालू माफिया

ब्यूरो, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • “DM कृतिका ज्योत्सना की साख दांव पर! खनन विभाग की सुस्ती या माफियाओं से ‘दोस्ती’? माझा खुर्द में दिन-रात गरज रही मशीनें।”
  • “तबाही का लाइसेंस या पट्टा? माझा खुर्द के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, बोले- ‘खनन नहीं रुका तो जलसमाधि को होंगे मजबूर’।”
  •  बालू माफियाओं के आगे नतमस्तक हुआ तंत्र, सरयू की कोख छननी कर रहे ‘खनन के सौदागर’।”

बस्ती। जनपद के माझा खुर्द में खनन माफियाओं ने इस कदर कोहराम मचा रखा है कि अब गाँव के अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ‘खादी, खाकी और खनन विभाग’ के कथित त्रिकोणीय गठजोड़ ने इन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि इन्हें न तो कानून का खौफ है और न ही प्रशासन का डर। आलम यह है कि प्रतिबंधित मशीनों की गूंज और ओवरलोड डंपरों की रफ्तार ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है।

बाढ़ की विभीषिका को खुला निमंत्रण

​माझा खुर्द के ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध पट्टाधारक अपनी मनमर्जी से नदी की जलधारा के बीच में अवैध खनन कर रहे हैं। इससे नदी का प्राकृतिक बहाव मुड़ रहा है, जो सीधे तौर पर आने वाले दिनों में भीषण कटान और बाढ़ की विभीषिका को निमंत्रण दे रहा है। हर साल सैकड़ों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि सरयू की धारा में विलीन हो रही है, लेकिन जिम्मेदार मौन साधे हुए हैं।

शाम होते ही गरजती हैं पोकलैंड, सड़कों पर ‘मौत’ की रफ्तार

​प्रतिबंधित होने के बावजूद शाम ढलते ही खनन क्षेत्रों में भारी मशीनें गरजने लगती हैं। बालू से लदे ओवरलोड डंपर और अनियंत्रित गति से भागते ट्रैक्टर-ट्रालियां न सिर्फ सड़कों को मलबे में तब्दील कर रहे हैं, बल्कि आए दिन हो रहे एक्सीडेंट्स से मासूमों की जान पर भी बन आ रही है। ग्रामीणों का दर्द यह है कि जिन जनप्रतिनिधियों को उनकी सुरक्षा का जिम्मा उठाना था, वे आज माफियाओं के साथ गलबहियां करते नजर आ रहे हैं।

राजस्व को चपत, पर्यावरण का कत्लेआम

​सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाकर अवैध खनन का यह काला कारोबार धड़ल्ले से जारी है। सवाल यह उठता है कि जब बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इस तरह का खनन ‘घोर अपराध’ की श्रेणी में आता है, तो फिर खनन माफियाओं को यह दुस्साहस करने की ताकत कहाँ से मिल रही है? आखिर कार्रवाई के नाम पर जिला प्रशासन के हाथ क्यों कांप रहे हैं?

तेजतर्रार डीएम कृतिका ज्योत्सना के लिए बड़ी चुनौती

​माझा खुर्द के ग्राम प्रधान और दर्जनों ग्रामीणों ने सामूहिक हस्ताक्षर कर इस अवैध कारोबार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में इसे ‘तबाही का लाइसेंस’ करार दिया है। अब देखना यह है कि जनपद की तेजतर्रार जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्सना इन बेखौफ माफियाओं के पट्टे निरस्त कर उन पर नकेल कसती हैं, या फिर कागजी कार्रवाई की आड़ में माझा खुर्द का अस्तित्व नक्शे से मिट जाएगा।

ग्रामीणों की चेतावनी: “अगर जल्द ही अवैध खनन नहीं रुका और गलत तरीके से जारी पट्टे निरस्त नहीं हुए, तो माझा खुर्द के किसान और ग्रामीण सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”

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